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समाज के नायक

एक बिहारी सब पर भारी


  • 06/07/2024
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अनिल अग्रवाल
2007 में बनी तेल और गैस उत्खनन कंपनी केयर्न इंडिया का नेचुरल रिर्सोसेज कंपनी वेदांता लिमिटेड में विलय हो जाएगा. बिजनेस टायकून की लिस्ट में शामिल वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.

कहते हैं 67 वर्षीय अनिल अग्रवाल की पढ़ाई 15 साल की उम्र में ही छूट गई थी. इसके बाद 19 साल की उम्र में वह जब बिहार से मुंबई के लिए रवाना हुए तो उनके पास एक टिफिन बॉक्स, उनका बिस्तर और उनकी आंखों में कुछ करने गुजरने का सपना भर था. न जेब में पैसे थे, न कोई ऐसा हाथ था जो मुंबई जैसे कुएं में उन्हें डूबने से बचा सकता. लेकिन उन्हें मुंबई में डूबना ही तो था, इसमें डूब कर खुद पर इस जादुई नगरी का रंग चढ़ाना था. उन्होंने तय कर लिया था कि कुछ भी हो जाए वो लौटेंगे नहीं. 
मुंबई को देखकर खा गए चक्कर: मुंबई में अपनी किस्मत आजमाने के लिए आने वाले लाखों लोगों में से एक अनिल अग्रवाल भी थे. मुंबई पहुंचते ही अनिल अग्रवाल की आंखें चौंधिया गई थीं. उन्होंने सड़कों पर बेलगाम दौड़ रही काली पीली टैक्सियां देखीं, ज़िंदगी में पहली बार डबल-डेकर देखी. ये सब वो पहली बार अपनी आंखों से देख रहे थे. इससे पहले जो देखा था सो फिल्मों में ही. 
मां के संघर्षों को रखा है याद : की जवानी ही नहीं बल्कि उनका बचपन भी संघर्षपूर्ण रहा. उन्होंने अपनी मां के बलिदान और त्याग की कहानी लोगों के साथ साझा करते हुए कहा कि उनके बचपन को उनकी मां के बलिदान ने सींचा और उन्हें उनके सपने पूरे करने का मौका दिया. एक समय था जब उनकी मां को 4 बच्चों का पेट भरने के लिए महज 400 रुपये मिलते थे. ऐसे में उनकी मां को अपनी भूख की चिंता नहीं रहती थी, वे बस चाहती थीं कि उनके बच्चों का पेट भर जाए. अनिल अग्रवाल खुद को इस बात के लिए भाग्यशाली मानते हैं कि वह आज भी अपनी मां के साथ रहते हैं और वह उन्हें हर रोज प्रेरणा देती हैं. बता दें कि दान देने के लिए हर समय तैयार रहने वाले अनुल अग्रवाल ने कोरोना काल में भी लोगों की मदद के लिए 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दान की थी.

छोटी दुकान से अरबों का साम्राज्य
अनिल अग्रवाल ने एक छोटी सी दुकान से अपना करियर की शुरुआत की. धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए उन्होंने भोईवाड़ा के मेटल मार्केट में 8x9 फुट का ऑफिस किराये पर लिया. यहां उन्होंने मेटल का कबाड़ बेचना शुरू किया. आज उनकी वो छोटी सी दुकान से शुरू हुए कारोबार का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.41 लाख करोड़ है. ग्लोबल बन चुकी अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता भारत के अलावा अफ्रीका, आयरलैंड और अस्ट्रेलिया समेत में कारोबार कर रही है. इस कंपनी में 65,000 से ज्यादा वर्कर्स काम कर रहे हैं. फोर्ब्स के अनुसार, वर्तमान में अनिल अग्रवाल की अनुमानित संपत्ति 3.6 बिलियन डॉलर है.